
जांच के घेरे में 7 डॉक्टर: पटवारी के 10 सर्टिफिकेट पर उठे सवाल
Posted on 21 जुलाई 2026
Listen News
Audio Summary
नागौर - राज्य के शिक्षा विभाग में शिक्षकों और कर्मचारियों की कार्यशैली पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन इस बार मामला कुछ गंभीर है। डीग में कार्यरत एक महिला पटवारी, चुंकी बाई, जो सितंबर 2024 से अप्रैल 2025 तक लगभग सात महीने तक बिना किसी सूचना के ड्यूटी से गायब रहीं, अब जांच के घेरे में हैं। चिंता की बात यह है कि इस अवधि के दौरान जालोर के सात डॉक्टरों द्वारा उन्हें तीन अलग-अलग बीमारियों के लिए 10 प्रमाण पत्र जारी किए गए।
जांच का दायरा और एसओजी का शिकंजा
सूत्रों के अनुसार, महिला पटवारी चुंकी बाई को पटवारी भर्ती परीक्षा में डमी बिठाने के मामले में एसओजी (Special Operations Group) की रडार पर आने के बाद से ही अनुपस्थित माना जा रहा था। जैसे ही वह फरवरी में ड्यूटी पर लौटीं, उन्होंने इन 10 प्रमाण पत्रों को जमा कराया, जिससे कई सवाल खड़े हो गए। डीग के जिलाधिकारी के आग्रह पर, जालोर के जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), डॉ. भैराराम जाणी को इस मामले की गहन जांच के निर्देश दिए थे।
चिकित्सा विभाग में हड़कंप: जांच कमेटी में बदलाव
शुरुआत में, इस मामले की जांच सांचौर में कार्यरत डॉ. रमा शंकर भारती की अध्यक्षता वाली एक कमेटी कर रही थी। सभी संबंधित डॉक्टरों को पूछताछ के लिए बुलाया गया, लेकिन डॉ. मांगीलाल को छोड़कर कोई भी उपस्थित नहीं हुआ। खास बात यह है कि सीएमएचओ डॉ. भैराराम के हस्ताक्षर से भी दो महत्वपूर्ण मेडिकल सर्टिफिकेट जारी किए गए थे। जब उनसे 4 जुलाई को जवाब मांगा गया, तो उन्होंने 7 जुलाई को जांच कमेटी को भंग कर दिया और डिप्टी सीएमएचओ व दो एलडीसी को शामिल करते हुए नई कमेटी का गठन किया।
अस्पतालों से जारी हुए संदिग्ध सर्टिफिकेट: इलाज के कोई सबूत नहीं
जांच में पाया गया कि विभिन्न अस्पतालों से जारी किए गए प्रमाण पत्रों में गंभीर खामियां हैं:
- सीएचसी हाडेचा: डॉ. मांगीलाल विश्नोई ने 15 अक्टूबर 2024 से 11 नवंबर (28 दिन) और 10 से 23 फरवरी 2025 (14 दिन) तक दो रोगों के प्रमाण पत्र जारी किए, लेकिन अस्पताल में किसी भी प्रकार के उपचार या जांच के दस्तावेज नहीं मिले।
- डूंगरी पीएचसी: डॉ. रामलाल विश्नोई ने 30 सितंबर से 6 अक्टूबर 2024, 7 अक्टूबर से 14 अक्टूबर, और 1 अप्रैल से 6 अप्रैल 2025 तक के प्रमाण पत्र जारी किए।
- पीएचसी डावल: डॉ. प्रियंका ने 13 नवंबर से 17 नवंबर 2024 तक का प्रमाण पत्र जारी किया।
- सांचौर अस्पताल: डॉ. भंवरलाल ने 18 जनवरी से 9 फरवरी 2025 और 24 फरवरी से 31 मार्च 2025 तक (36 दिन) का लंबा मेडिकल जारी किया, जबकि वे 15 दिन से अधिक का मेडिकल जारी करने के लिए अधिकृत नहीं थे। इसमें अज्ञात बुखार बताया गया, लेकिन न ओपीडी पर्ची और न ही जांच के कोई प्रमाण उपलब्ध हैं।
एक ही दिन स्वस्थ, दूसरे सर्टिफिकेट में बीमार!
यह भी सामने आया है कि जिस दिन एक मेडिकल सर्टिफिकेट में पटवारी को स्वस्थ बताया गया, उसी दिन दूसरे सर्टिफिकेट में उन्हें फिर से बीमार घोषित कर दिया गया। तत्कालीन सांचौर पीएमओ डॉ. भैराराम जाणी (जो बाद में सीएमएचओ बने) ने एक कमेटी गठित कर डेंगू (18 दिन) और स्लिप डिस्क (42 दिन) जैसी बीमारियों के प्रमाण पत्र जारी करवाए, जिनमें प्रयोगशाला जांच या अन्य आवश्यक दस्तावेजों का अभाव था। यह स्थिति चिकित्सा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।
📲 खबर पसंद आई?
अपने दोस्तों के साथ शेयर करें!

Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।