
टोंक बालिका छात्रावास में बदहाल व्यवस्थाएं, टूटे दरवाजे और खराब कूलर
Posted on 28 जुलाई 2026
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हमारे **नागौर** संवाददाता के अनुसार, प्रदेश के आवासीय बालिका विद्यालयों में व्यवस्थाओं की पोल खोलती तस्वीरें सामने आ रही हैं। हाल ही में टोंक के युसुफपुरा चराई स्थित राजकीय देवनारायण आवासीय बालिका स्कूल व छात्रावास का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां छात्राओं को मूलभूत सुविधाओं के अभाव में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति प्रदेश के शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है।
बालिकाओं की समस्याओं पर जनप्रतिनिधियों की नजर
गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष विजय बैंसला ने हाल ही में टोंक के राजकीय देवनारायण आवासीय बालिका स्कूल व छात्रावास का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने छात्राओं से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को जाना। गौरतलब है कि 19 जुलाई को भी छात्राओं ने स्थायी प्राचार्य, वार्डन की नियुक्ति, स्टाफ की कमी, नियमित स्वास्थ्य जांच और शैक्षणिक व आवासीय व्यवस्थाओं में सुधार की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन किया था। बैंसला ने अधिकारियों को छात्राओं की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करने के निर्देश दिए।
छात्रावासों में गंभीर अनियमितताएं
विजय बैंसला ने टोंक कलेक्टर टीना डाबी से मुलाकात कर अनियमितताओं से अवगत कराया और रिक्त पदों को शीघ्र भरने की मांग की। उन्होंने नवनिर्मित मां पन्नाधाय बालिका गुर्जर छात्रावास का भी अवलोकन किया। श्री देवनारायण शिक्षा समिति द्वारा संचालित इस छात्रावास में 27 से 31 जुलाई तक प्रवेश प्रक्रिया चलेगी और 1 अगस्त से नियमित आवासीय व्यवस्था शुरू होगी। हालांकि, बैंसला के निरीक्षण के दौरान इस छात्रावास में भी कई खामियां पाई गईं। यहां अध्ययनरत 250 छात्राओं ने बताया कि छात्रावास में पिछले 4 साल से कोई वार्डन नहीं है। इसके अलावा, स्थायी प्राचार्य और लेखाकार का भी अभाव है। केवल 3 स्थायी शिक्षक ही कार्यरत हैं। शौचालयों के दरवाजे टूटे हुए हैं और वॉटर कूलर भी खराब स्थिति में है, जिससे छात्राओं को भारी असुविधा हो रही है।
प्रशासनिक सुधार के दावे
इस संबंध में, राजकीय देवनारायण आवासीय बालिका स्कूल के प्रभारी प्राचार्य घासीलाल गुर्जर ने कहा कि छात्राओं द्वारा उठाई गई समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। निरीक्षण के दौरान टूटे पाए गए बाथरूम के दरवाजों की शीघ्र मरम्मत कराई जाएगी। साथ ही, स्कूल को ग्रामीण फीडर से मुक्त करने के प्रयास किए जाएंगे।
यह घटना प्रदेश के कई अन्य आवासीय विद्यालयों में व्याप्त अव्यवस्थाओं की ओर भी इशारा करती है, जहां छात्राओं की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। शिक्षा विभाग को ऐसे मामलों में तत्काल हस्तक्षेप कर सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि सभी छात्राओं को एक सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सके।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।