
नागौर में विद्यालयों में नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान, छात्रों को दिलाई संकल्प दिलाई
Posted on 22 जुलाई 2026
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हमारे **नागौर** संवाददाता के अनुसार, जिले के विभिन्न विद्यालयों में मंगलवार को 'ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडेज' अभियान के तहत नशे के विरुद्ध जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में चलाए गए इस विशेष अभियान का उद्देश्य विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराना और उन्हें एक स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था। इस माह के लिए "नशे को ना कहो, अपने सपनों को हां कहो" और "नशा कोई स्टाइल नहीं, अपने मन, शरीर और भविष्य की रक्षा करो" जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जोर दिया गया।
विभिन्न स्कूलों में आयोजित हुए विधिक साक्षरता शिविर
मंगलवार, 21 जुलाई को जिले के 17 सरकारी और निजी विद्यालयों में प्रातःकालीन प्रार्थना सभा के पश्चात विधिक साक्षरता शिविरों का आयोजन किया गया। न्यायिक अधिकारियों ने स्वयं इन सत्रों की अध्यक्षता की और कक्षा 8वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को नशे के गंभीर खतरों से परिचित कराया। उन्होंने नशे से संबंधित कठोर कानूनी प्रावधानों की भी जानकारी दी। यह आयोजन चरणबद्ध और रोटेशनल तरीके से संचालित किया गया, जिसमें प्रत्येक सत्र की अवधि 30 से 60 मिनट तक रखी गई। विद्यालय के नियमित समय-सारणी का पालन करते हुए, यह सुनिश्चित किया गया कि विद्यार्थियों की पढ़ाई में कोई व्यवधान न आए। न्यायिक अधिकारियों के साथ उनके कोर्ट स्टाफ ने भी इस जागरूकता अभियान में सक्रिय सहभागिता निभाई।
नशे के कारणों और दुष्प्रभावों पर विस्तृत चर्चा
अधिकारियों ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (रालसा) द्वारा प्रकाशित विशेष पुस्तिकाओं का उपयोग करते हुए विद्यार्थियों को नशे की गिरफ्त में आने के विभिन्न कारणों पर प्रकाश डाला। इनमें सहपाठियों का दबाव, जिज्ञासा, सोशल मीडिया का नकारात्मक प्रभाव और मानसिक तनाव जैसे प्रमुख कारण बताए गए। नशे के सेवन से होने वाले शारीरिक, मानसिक, पारिवारिक और सामाजिक दुष्प्रभावों को विस्तार से समझाया गया। बाल-केंद्रित पुस्तिकाओं के माध्यम से, एनडीपीएस अधिनियम 1985 के प्रावधानों को सरल भाषा में विद्यार्थियों के समक्ष प्रस्तुत किया गया। यह भी स्पष्ट किया गया कि 18 वर्ष से कम आयु के किशोरों के लिए, सजा के प्रावधानों की तुलना में सुधार, परामर्श और पुनर्वास पर अधिक बल दिया गया है।
युवा पीढ़ी को सुरक्षित भविष्य की ओर प्रेरित करने का प्रयास
सत्रों के दौरान, तंबाकू, शराब, स्मैक और व्हाइटनर जैसे विभिन्न नशीले पदार्थों के किशोरों के विकासशील मस्तिष्क और शरीर पर पड़ने वाले घातक प्रभावों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। विद्यार्थियों को समझाया गया कि नशा किस प्रकार उनकी मेधा को प्रभावित करता है और उन्हें अवसाद की ओर धकेल सकता है। नशे के कारण परिवारों और समाज में आने वाली दरार पर भी चर्चा की गई। सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे भ्रामक ट्रेंड्स और ऑनलाइन ड्रग नेटवर्क के माध्यम से ब्लैकमेलिंग व यौन शोषण जैसे गंभीर खतरों से आगाह किया गया। विद्यार्थियों के व्यवहार में दिखने वाले शुरुआती चेतावनी संकेतों की पहचान करने के तरीके भी बताए गए। कार्यक्रम के अंत में, सभी विद्यार्थियों ने नशे के किसी भी प्रस्ताव को अस्वीकार करने और ऐसी किसी भी स्थिति में अपने माता-पिता अथवा विद्यालय प्रबंधन को सूचित करने का संकल्प लिया।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।