
नागौर के जर्जर सरकारी भवनों पर प्रशासन सख्त: अब खाली पड़े स्कूल और एएनएम केंद्रों का होगा कायाकल्प
Posted on 21 जुलाई 2026
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, जिले भर में सरकारी उदासीनता का शिकार हो चुके सरकारी भवनों, विशेषकर शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग की संपत्तियों को लेकर अब उच्च स्तर पर मंथन शुरू हो गया है। बीते कई वर्षों से लाखों रुपये की लागत से बने स्कूल, एएनएम केंद्र और पीएचसी भवन उपेक्षा के कारण जर्जर हो चुके हैं।
शिक्षा विभाग की संपत्ति का दुरुपयोग चिंताजनक
हालिया स्थिति यह है कि जिले के कई सुदूर क्षेत्रों में 1990 के दशक में निर्मित स्कूल भवन अब वीरान पड़े हैं। निर्माण कार्यों में रही तकनीकी खामियों और समय पर मरम्मत न होने के कारण ये भवन न केवल अपनी उपयोगिता खो चुके हैं, बल्कि असामाजिक गतिविधियों और अतिक्रमण का केंद्र बन गए हैं। शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों ने इन भवनों की बदहाली को गंभीरता से लिया है।
मुख्य बिंदु: प्रशासन की क्या है योजना?
- सर्वेक्षण प्रक्रिया: बीकानेर निदेशालय द्वारा सभी ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्राधिकार में आने वाले सभी जर्जर भवनों की सूची तैयार करें।
- उपयोगिता की समीक्षा: जो भवन शिक्षा के काम में नहीं आ रहे हैं, उन्हें या तो मरम्मत कर पुन: शुरू किया जाएगा या उनकी नीलामी/उपयोग के संबंध में जयपुर सचिवालय को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
- सुरक्षा ऑडिट: स्कूल भवनों में खरपतवार और टूट-फूट को देखते हुए छात्रों की सुरक्षा के मद्देनजर 'शाला दर्पण' पोर्टल पर इन भवनों की वर्तमान स्थिति को अपडेट करने के निर्देश दिए गए हैं।
- अतिक्रमण पर कार्रवाई: सरकारी भवनों के कमरों का अन्य कार्यों (जैसे शौचालय या निजी भंडारण) के लिए उपयोग करने वालों के खिलाफ स्थानीय प्रशासन सख्त कार्रवाई की तैयारी में है।
शिक्षकों और अभिभावकों के लिए संदेश
हमारे नागौर संवाददाता के मुताबिक, शिक्षा विभाग अब इस बात पर जोर दे रहा है कि जिस क्षेत्र में सरकारी स्कूल भवन खंडहर हो रहे हैं, वहां के स्थानीय शाला विकास समिति (SMC) के माध्यम से प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत हेतु बजट मांगा जाए। शिक्षा विभाग स्पष्ट कर चुका है कि सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि आपके आसपास कोई ऐसा सरकारी भवन है जो जर्जर है, तो उसकी सूचना तत्काल निकटतम ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) को दें ताकि समय रहते उसका जीर्णोद्धार संभव हो सके।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।