
मेड़ता: 79 साल बाद भी गांवों को रोडवेज बस का इंतजार, निजी बसों के भरोसे सफर
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हमारे मेड़ता संवाददाता के अनुसार, नागौर जिले के मेड़ता उपखंड और खींवसर विधानसभा क्षेत्र की 20 से अधिक ग्राम पंचायतें आज भी राजस्थान रोडवेज की नियमित बस सेवा से वंचित हैं। आजादी के 79 वर्षों बाद भी इन गांवों तक रोडवेज बसें नहीं पहुंच पाई हैं, जिससे हजारों ग्रामीणों को निजी बसों और अन्य निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इस गंभीर समस्या के कारण विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों, किसानों, बुजुर्गों और मरीजों को प्रतिदिन भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। हमारी टीम को मिली जानकारी के अनुसार, इस संबंध में जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों से कई बार मांग की जा चुकी है, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है।
निजी बसों का मनमाना किराया और बढ़ती मुश्किलें
ग्रामीणों का कहना है कि रोडवेज बस सेवा न होने के कारण निजी बस संचालक मनमाना किराया वसूलते हैं, जिससे उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। कई बार तो निजी बसों में क्षमता से अधिक सवारियां भरी जाती हैं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाती है। इस लंबी दूरी की यात्रा और अधिक किराए की समस्या से ग्रामीणों को रोजाना जूझना पड़ता है, खासकर उन लोगों को जो दैनिक आवश्यकताओं या रोजगार के लिए शहरी केंद्रों की यात्रा करते हैं।
पीपीपी योजना भी नहीं दिला सकी राहत
पूर्ववर्ती राज्य सरकार ने रोडवेज सुविधा से वंचित ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्य मार्गों से जोड़ने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) योजना शुरू की थी। इस योजना का उद्देश्य निजी बस संचालकों को निर्धारित मापदंडों के अनुसार आर्थिक सहायता प्रदान कर ग्रामीण रूटों पर बसें चलवाना था। इसके लिए आवेदन भी आमंत्रित किए गए थे, लेकिन निजी बस संचालकों ने इसमें कोई विशेष रुचि नहीं दिखाई, जिसके कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी और ग्रामीणों को कोई राहत नहीं मिल पाई।
ग्रामीण रूट छोड़ हाइवे पर दौड़ रही बसें
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि जिन निजी बस संचालकों के पास ग्रामीण मार्गों के परमिट हैं, उनमें से कई अधिक सवारियां मिलने के लालच में अपनी बसों का संचालन निर्धारित ग्रामीण मार्गों की बजाय सीधे हाइवे पर कर रहे हैं। परिवहन विभाग की इस ओर नियमित निगरानी न होने के कारण यह समस्या और विकराल रूप ले चुकी है। यदि परिवहन विभाग ऐसे वाहनों की सघन निगरानी कर उन्हें निर्धारित रूट पर बसों का संचालन सुनिश्चित करवाए तो ग्रामीणों को काफी हद तक राहत मिल सकती है।
पुरानी बस सेवा भी बंद, नई की उम्मीद दूर
क्षेत्र में पहले से चल रही बस सेवाएं भी अब बंद हो रही हैं, जिससे ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। हरसोलाव गांव से भोपालगढ़ होते हुए जोधपुर जाने वाली वर्षों पुरानी रोडवेज बस सेवा को विभाग ने बसों की कमी का हवाला देकर बंद कर दिया है। नई बसें शुरू करने के बजाय पुरानी सुविधा भी समाप्त होने से ग्रामीण क्षेत्रों में आक्रोश व्याप्त है।
ग्रामीणों की जुबानी दर्द
- समाजसेवी पदमसिंह ने बताया कि उनकी उम्र 70 वर्ष हो चुकी है और उन्होंने आज तक रियांश्यामदास गांव में रोडवेज बस आते नहीं देखी। उन्होंने रियांश्यामदास-लाम्बा जाटान-मेड़ता सिटी-दधवाड़ा-रूण-मूंडवा-नागौर रूट पर रोडवेज बस सेवा शुरू करने की मांग की है।
- रोल चांदावता ग्राम पंचायत के प्रशासक अर्जुनराम गुर्जर ने भी इस बात की पुष्टि की कि क्षेत्र की अधिकांश ग्राम पंचायतों से उपखंड मुख्यालय तक रोडवेज बस सुविधा वर्षों से नहीं है। उन्होंने कहा कि कई बार मांग उठाने के बावजूद इस समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल परिवहन का मुद्दा नहीं, बल्कि विकास और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ा एक गंभीर प्रश्न है, जिसका समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए। हमारी टीम लगातार इस मुद्दे पर अपनी नजर बनाए हुए है और संबंधित अधिकारियों से प्रतिक्रिया जानने का प्रयास कर रही है।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।