
मेड़ता: कार्यस्थलों पर स्तनपान सुविधाओं का अभाव, माताओं को हो रही परेशानी
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मेड़ता। विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान भले ही मातृ दुग्ध के महत्व पर जोर दिया जा रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आज भी कामकाजी महिलाओं को स्तनपान कराने के लिए अनुकूल माहौल और आवश्यक सुविधाओं का अभाव झेलना पड़ रहा है। मेड़ता क्षेत्र की कई माताओं ने बताया कि घर की जिम्मेदारियों और नौकरी के बीच संतुलन बनाते हुए, कार्यस्थलों पर एकांत स्थान नहीं मिलने तथा सार्वजनिक जगहों पर असहज माहौल के कारण उन्हें अपने शिशुओं को समय पर दूध पिलाने में कठिनाई होती है। इसका सीधा असर नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
कार्यस्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर सुविधाओं का अभाव एक बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल जागरूकता अभियान चलाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि कार्यस्थलों और समाज में एक ऐसा सहायक वातावरण तैयार करना भी अत्यंत आवश्यक है, जहां माताएं बिना किसी झिझक के अपने शिशुओं को स्तनपान करा सकें। मेड़ता उपजिला चिकित्सालय के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. बलदेव राम चौधरी के अनुसार, मां का पहला गाढ़ा दूध बच्चे के लिए जीवन रक्षक का कार्य करता है, जो उसे कई गंभीर बीमारियों से बचाता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि स्तनपान केवल मां की व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार, कार्यस्थल और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
- अधिकांश कार्यालयों में स्तनपान कक्ष (फीडिंग रूम) की व्यवस्था नगण्य है।
- मातृत्व अवकाश के बाद लौटने वाली महिलाओं को पर्याप्त फीडिंग ब्रेक नहीं मिल पाते।
- बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, पार्क और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी स्तनपान के लिए सुरक्षित एवं सम्मानजनक स्थानों का अभाव है।
- सामाजिक झिझक और सुविधाओं की कमी कामकाजी माताओं के लिए बड़ी बाधाएं हैं।
डॉ. चौधरी ने आगे कहा कि यदि महिलाओं को सहयोगी माहौल और आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाएं, तो निश्चित रूप से हर नवजात को उसका पहला और सबसे महत्वपूर्ण अधिकार सहज रूप से प्राप्त हो सकेगा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि शहरी क्षेत्रों में पढ़ी-लिखी माताएं भी, गांवों की असाक्षर महिलाओं की तुलना में बच्चों को कम स्तनपान करा रही हैं, जो चिंता का विषय है। यह स्थिति बच्चों के स्वास्थ्य और विकास के लिए एक गंभीर चुनौती पेश करती है।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।