
डीडवाना में 'गुरु वंदन-छात्र अभिनंदन' समारोह, शिक्षा और संस्कार पर जोर
Posted on 25 जुलाई 2026
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हमारे डीडवाना संवाददाता के अनुसार, शिक्षा के महत्व, गुरु-शिष्य परंपरा के सम्मान और राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका को रेखांकित करने वाले एक महत्वपूर्ण आयोजन में, डीडवाना के गीतांजलि सीनियर सेकेंडरी स्कूल में मेधावी विद्यार्थियों और उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया गया। भारत विकास परिषद्, कुचामन शहर द्वारा आयोजित 'गुरु वंदन-छात्र अभिनंदन' कार्यक्रम ने न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता को सराहा, बल्कि युवाओं में संस्कारों और राष्ट्रहित की भावना को भी प्रबल करने का संदेश दिया। यह पहल वर्तमान शैक्षणिक सत्र में विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए प्रेरणा का एक नया स्रोत बनकर उभरी है।
कार्यक्रम का शुभारंभ और प्रमुख संदेश
कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ परिषद् के अध्यक्ष एडवोकेट ओमप्रकाश सेन, संरक्षक डॉ. गोविंदराम चौधरी, स्कूल संरक्षक दिनेश चौधरी और गुलाब चौधरी सहित अन्य गणमान्य पदाधिकारियों द्वारा मां भारती और स्वामी विवेकानंद के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्वलित कर और पुष्प अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों के महत्व पर विशेष बल दिया। परिषद् के वरिष्ठ सदस्य महेंद्र वर्मा ने 'व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण' की अवधारणा को विस्तार से समझाया, यह बताते हुए कि कैसे एक सुसंस्कृत व्यक्ति ही एक मजबूत राष्ट्र की नींव रख सकता है। उन्होंने भारत विकास परिषद् की विभिन्न सेवा और संस्कार आधारित गतिविधियों की जानकारी भी साझा की, जो समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए समर्पित हैं।
संस्कार गतिविधि संयोजक जयप्रकाश शर्मा ने विद्यार्थियों को भारत की गौरवशाली गुरु-शिष्य परंपरा से परिचित कराया। उन्होंने जीवन में एक शिक्षक की भूमिका को अमूल्य बताया और कहा कि गुरु ही वह प्रकाश पुंज है जो शिष्य को अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ज्ञान के पथ पर अग्रसर करता है। इस दौरान, उन्होंने विद्यार्थियों को सदैव अपने गुरुजनों का सम्मान करने और उनके मार्गदर्शन का अनुसरण करने का आह्वान किया।
मेधावी विद्यार्थियों और उत्कृष्ट शिक्षकों का सम्मान
पिछले शैक्षणिक सत्र में अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से विद्यालय का नाम रोशन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को इस अवसर पर विशेष रूप से सम्मानित किया गया। शौर्य राठौड़, मनीष, प्रियांशी जांगिड़, दीक्षा कंवर, निर्मलसिंह गुर्जर, अमन कुरैशी और मनजीतसिंह राजावत को उनके कठोर परिश्रम और अकादमिक सफलता के लिए दुपट्टा, स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र भेंट कर उनका हौसला बढ़ाया गया। यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत प्रयासों की पहचान था, बल्कि अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बना।
विद्यार्थियों के साथ-साथ, बेहतर शिक्षण कार्य के लिए समर्पित शिक्षकों का भी सम्मान किया गया। द्वारकाप्रसाद शर्मा, इंदु कुमारी चौधरी, युवराज बटेसर, गोवर्धन चूला, तरुण खंडेलवाल, गोपाल शर्मा और शारदा गावड़िया जैसे शिक्षकों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सराहा गया। यह सम्मान दर्शाता है कि शिक्षा प्रणाली में शिक्षकों का महत्व सर्वोपरि है और उनके अथक प्रयास ही विद्यार्थियों के भविष्य को आकार देते हैं।
नियमित आयोजनों की आवश्यकता पर बल
स्कूल के संरक्षक दिनेश चौधरी ने भारत विकास परिषद् के इस सराहनीय प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी ऐसे प्रेरक कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे ताकि विद्यार्थियों को निरंतर मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिल सके। चौधरी ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे राष्ट्र को सर्वोपरि मानकर जीवन में आगे बढ़ें और अपने देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझें।
कार्यक्रम के अंत में, परिषद् अध्यक्ष एडवोकेट ओमप्रकाश सेन ने गीतांजलि सीनियर सेकेंडरी स्कूल प्रशासन, प्रधानाध्यापक और समस्त स्टाफ का इस सफल आयोजन के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर परिषद् के सेवा गतिविधि संयोजक सुशील काबरा, संपर्क संयोजक शरद सोमानी, स्कूल के शिक्षक-शिक्षिकाएं, स्टाफ सदस्य और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे, जिन्होंने इस प्रेरक समारोह को सफल बनाया। हमारी टीम का मानना है कि ऐसे आयोजन न केवल शैक्षिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देते हैं, बल्कि विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच एक मजबूत बंधन भी स्थापित करते हैं।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।