
राजस्थान शिक्षा विभाग: जर्जर भवनों और खेल मैदान विवाद के चलते स्कूलों में विरोध तेज
Posted on 25 जुलाई 2026
Listen News
Audio Summary
हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, राजस्थान के सरकारी विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है। हाल ही में पीसांगन उपखंड क्षेत्र के एक राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में ग्रामीणों द्वारा मुख्य द्वार पर तालाबंदी करने का मामला सामने आया है। यह घटना प्रदेश भर के उन स्कूलों के लिए एक चेतावनी है, जहां जर्जर भवन और खेल मैदानों के अतिक्रमण जैसी समस्याएं लंबे समय से लंबित हैं।
शिक्षा विभाग की चिंताएं और सुरक्षा का मुद्दा
बीकानेर निदेशालय (Bikaner Nideshalaya) को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार, अभिभावकों ने स्पष्ट किया है कि जब तक बच्चों को सुरक्षित भवन उपलब्ध नहीं कराया जाता, तब तक वे स्कूलों में किसी भी प्रकार के शैक्षणिक कार्य को सुचारू रूप से चलने नहीं देंगे। स्थानीय निवासियों की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
- जर्जर भवन की मरम्मत: स्कूल की वर्तमान इमारत जर्जर अवस्था में है, जिससे छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा पैदा हो गया है। अभिभावक अब किसी भी अनहोनी की जिम्मेदारी विभाग पर डाल रहे हैं।
- खेल मैदान का सीमांकन: खेल मैदान के रकबे को विद्यालय के नाम आवंटित करने की मांग लंबे समय से की जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि खेल गतिविधियों के लिए सुरक्षित जमीन उपलब्ध न होने से छात्रों का सर्वांगीण विकास बाधित हो रहा है।
- प्रशासनिक हस्तक्षेप: विधायक स्तर पर हुई बातचीत के बाद समस्या निस्तारण का आश्वासन तो दिया गया है, लेकिन धरातल पर अभी भी स्पष्ट दिशा-निर्देशों का इंतजार है।
शिक्षा विभाग पर दबाव
जयपुर सचिवालय (Jaipur Sachivalaya) के आदेशानुसार, राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र के जर्जर विद्यालयों का भौतिक सत्यापन करें। यदि किसी स्कूल की इमारत खतरनाक स्थिति में है, तो तत्काल प्रभाव से उसे खाली कर वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।
शिक्षकों और अभिभावकों के लिए संदेश
यदि आपके स्थानीय क्षेत्र में भी स्कूल भवन की स्थिति चिंताजनक है, तो 'शाला दर्पण' पोर्टल पर इसकी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। यह विरोध प्रदर्शन स्पष्ट करता है कि शिक्षा विभाग को अब केवल पठन-पाठन तक ही सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि स्कूल परिसर की सुरक्षा और सुविधाओं पर भी ध्यान देना होगा। आने वाले समय में विभाग इन स्कूलों की सूची तैयार कर नई बिल्डिंग के लिए बजट आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
📲 खबर पसंद आई?
अपने दोस्तों के साथ शेयर करें!

Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।