
निजी स्कूल संचालकों ने बार-बार हो रही जांच पर जताई आपत्ति, शिक्षा अधिकारी से की चर्चा
Posted on 22 जुलाई 2026
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नागौर | निजी विद्यालय संचालकों ने शिक्षा विभाग की बार-बार हो रही निरीक्षण जांचों पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। जिला मुख्यालय पर मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी (सीडीईओ) कार्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में, प्रदेश भर से आए गैर-सरकारी विद्यालय संचालकों ने अपनी लंबित समस्याओं और निरीक्षण प्रक्रिया की अधिकता को लेकर अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखी।
निरीक्षणों की अधिकता से शिक्षण कार्य प्रभावित
बैठक में विद्यालय संचालकों ने इस बात पर जोर दिया कि एक ही विद्यालय का बार-बार निरीक्षण किया जाना, चाहे वह शाला संबलन जांच हो, आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत औचक जांच हो, या अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं हों, शिक्षण व्यवस्था को गंभीर रूप से बाधित करता है। संचालकों का तर्क है कि ऐसे अनावश्यक निरीक्षणों से शिक्षकों का ध्यान अध्यापन से हटता है और विद्यालय के नियमित संचालन में बाधा आती है। उन्होंने मांग की कि केवल उन्हीं विद्यालयों की जांच की जाए जिनके खिलाफ कोई विशिष्ट शिकायत हो या जिनमें किसी प्रकार की कमी पाई गई हो, न कि सभी विद्यालयों का नियमित रूप से निरीक्षण किया जाए।
आरटीई भुगतान और टीसी जारी करने में समस्याएँ
विद्यालय संचालकों ने यह भी अवगत कराया कि वर्तमान में यू-डाइस और पीएसपी पोर्टल पर डेटा के मिसमैच के कारण आरटीई के तहत मिलने वाला भुगतान अटक गया है। इसके अतिरिक्त, बिना शुल्क के टीसी (स्थानांतरण प्रमाण पत्र) जारी करने के विभागीय आदेश भी निजी विद्यालयों के लिए वित्तीय और प्रशासनिक परेशानी का कारण बन रहे हैं। स्कूल संचालकों ने इन मुद्दों पर भी तत्काल समाधान की अपेक्षा व्यक्त की।
अवैध कोचिंग और गैर-मान्यता प्राप्त विद्यालयों पर कार्रवाई की मांग
बैठक के दौरान, कुछ विद्यालय संचालकों ने जिले में स्कूल समय के दौरान संचालित हो रही गैर-मान्यता प्राप्त कोचिंग संस्थाओं और अवैध विद्यालयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि इन पर शिकायतों के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो पा रही है, जिससे मान्यता प्राप्त विद्यालयों के समक्ष प्रतिस्पर्धात्मक और नैतिक चुनौतियाँ उत्पन्न होती हैं। कुछ बंद पड़े विद्यालयों में फर्जी नामांकन के माध्यम से आरटीई भुगतान लेने के मामलों की भी जांच की मांग की गई।
मुख्य माँगें
- बार-बार होने वाले निरीक्षणों को रोका जाए, केवल शिकायत पर जांच हो।
- आरटीई भुगतान में आ रही यू-डाइस व पीएसपी पोर्टल की समस्या का समाधान हो।
- बिना शुल्क टीसी जारी करने के आदेशों पर पुनर्विचार किया जाए।
- गैर-मान्यता प्राप्त कोचिंग और अवैध विद्यालयों पर कार्रवाई हो।
मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी रामनिवास शर्मा और अन्य अधिकारियों ने उपस्थित विद्यालय संचालकों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों और समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और विभाग की ओर से उचित कदम उठाए जाएंगे।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।