
राजस्थान में छात्रों का आक्रोश: शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग, पेपर लीक पर सख्त कानून
Posted on 23 जुलाई 2026
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नागौर, राजस्थान। प्रदेश भर के छात्र-छात्राओं में शिक्षा व्यवस्था को लेकर गहरा असंतोष व्याप्त है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे व्यापक छात्र आंदोलन के समर्थन में राजस्थान के विभिन्न हिस्सों से आवाजें बुलंद हो रही हैं। इसी कड़ी में, छात्रों और आम नागरिकों ने गुरुवार को राज्य सरकार और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने राष्ट्रपति के नाम जिला कलेक्टर को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और पेपर लीक मामलों पर सख्त कार्रवाई की मांग प्रमुखता से उठाई गई।
छात्रों के भविष्य से खिलवाड़: पेपर लीक पर आक्रोश
हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, प्रदर्शनकारियों का मुख्य आरोप यह है कि बार-बार हो रहे पेपर लीक से लाखों विद्यार्थियों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़ है। ज्ञापन में मांग की गई कि ऐसे मामलों में संलिप्त दोषियों के खिलाफ तत्काल और कठोर कार्रवाई की जाए। जांच में हो रही देरी से छात्रों और उनके अभिभावकों में भारी आक्रोश है, जो अब सड़कों पर उतरने को मजबूर हो गए हैं।
पुलिस कार्रवाई पर निंदा और कार्रवाई की मांग
ज्ञापन में दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलनरत छात्रों पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज और बल प्रयोग की कड़ी निंदा की गई। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने महिलाओं और छात्रों के साथ अभद्र व्यवहार किया, जो बेहद शर्मनाक है। उन्होंने यह भी बताया कि कई पुलिसकर्मी बिना नेम प्लेट के ड्यूटी करते दिखे, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया। छात्रों ने बिना नाम पट्टिका के ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों और बिना वर्दी के कार्रवाई में शामिल व्यक्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। यह घटनाक्रम पुलिस प्रशासन की जवाबदेही पर भी सवालिया निशान लगाता है।
सरकार से संवाद और मांगे
छात्र नेताओं ने सरकार पर आंदोलनरत छात्रों से संवाद न करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि 20 दिनों से अधिक समय से छात्र अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं, लेकिन सरकार ने उनसे बात करने का कोई प्रयास नहीं किया। उन्होंने मांग की:
- दिल्ली में आंदोलन कर रहे छात्रों पर दर्ज सभी मुकदमे तत्काल वापस लिए जाएं।
- सरकार छात्रों से वार्ता के लिए एक उच्च स्तरीय पैनल का गठन करे।
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए, क्योंकि पेपर लीक जैसी घटनाओं ने पूरे शिक्षा तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सरकारी स्कूलों की जर्जर हालत और शिक्षा की गुणवत्ता
प्रदर्शन के दौरान एक स्थानीय नागरिक ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों की बदहाली पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि केवल स्कूल भवन बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी गुणवत्ता और रखरखाव की जिम्मेदारी भी सरकार की है। आरोप लगाया गया कि प्रदेश के लगभग 80 प्रतिशत सरकारी स्कूल जर्जर स्थिति में हैं। इस कारण आज सरकारी स्कूलों की स्थिति ऐसी हो गई है कि लोग निजी स्कूलों को प्राथमिकता देने लगे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि एक समय था जब पूरा देश सरकारी स्कूलों में पढ़ता था और अधिकांश लोगों ने सरकारी स्कूल से ही शिक्षा प्राप्त की थी, लेकिन अब लोग सरकारी स्कूलों की ओर देखना भी नहीं चाहते। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, मजबूत कानून और गुणवत्तापूर्ण सरकारी शिक्षा पर गंभीरता से काम करने की आवश्यकता पर बल दिया।
अनिश्चितकालीन धरने की तैयारी
प्रदर्शनकारियों ने अपनी बात रखते हुए कहा कि जब तक दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन जारी रहेगा, तब तक वे भी राज्य में शांतिपूर्ण धरने और प्रदर्शन जारी रखेंगे। उन्होंने प्रशासन से अनिश्चितकालीन धरने के लिए अनुमति मांगी है और प्रक्रिया की जानकारी भी ली है। हम, डेली ढंडोरा की टीम, इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर अपनी पैनी नज़र बनाए हुए हैं और शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे इन बदलावों को अपने पाठकों तक पहुंचाते रहेंगे।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।