
नागौर की बेटी को मिला सम्मान: राष्ट्रपति राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित
Posted on 19 जुलाई 2026
Listen News
Audio Summary
हमारे **नागौर** संवाददाता के अनुसार, एक माँ के अदम्य साहस और नवाचार की कहानी पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है। पाली जिले की रहने वाली साइकोलॉजिस्ट नेहा सोलंकी को दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष कुर्सी बनाने के उनके अभूतपूर्व कार्य के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान 31 जुलाई 2026 को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में प्रदान किया जाएगा।
बेटे की तकलीफ से जन्मी प्रेरणा
नेहा सोलंकी के बेटे को 6 महीने की उम्र में सेरेब्रल पाल्सी जैसी गंभीर बीमारी का पता चला। इस बीमारी के कारण बच्चे को बैठने, उठने और संतुलन बनाए रखने में अत्यधिक कठिनाई होती है। बेटे की पीड़ा देखकर नेहा ने ठान लिया कि वह विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के जीवन को आसान बनाने के लिए कुछ करेंगी।
स्कूलों के इनकार से बनी विशेष कुर्सी
वर्ष 2023 में जब नेहा ने अपने बेटे के प्रवेश के लिए स्कूलों के चक्कर लगाए, तो कई निजी स्कूलों ने उसकी शारीरिक स्थिति का हवाला देते हुए उसे प्रवेश देने से इनकार कर दिया। एक स्कूल ने शर्त रखी कि यदि बच्चा सुरक्षित रूप से बैठ सके तो प्रवेश दिया जाएगा। इसी चुनौती ने नेहा को एक विशेष प्रकार की कुर्सी बनाने के लिए प्रेरित किया।
9 महीने की मेहनत से तैयार हुई 'जीवनदायिनी' कुर्सी
लगभग 9 महीने की गहन शोध और अथक परिश्रम के बाद, नेहा ने एक ऐसी विशेष कुर्सी का निर्माण किया जो सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित बच्चों को बिना किसी सहारे के सुरक्षित और आरामदायक ढंग से बैठने में मदद करती है। इस कुर्सी में बच्चे के शरीर को आवश्यक सपोर्ट मिलता है, जिससे गिरने का खतरा न्यूनतम हो जाता है। इस नवाचार के फलस्वरूप, नेहा का 10 वर्षीय बेटा अब सामान्य बच्चों के साथ स्कूल जा पा रहा है। यह कुर्सी 3 से 12 वर्ष तक के बच्चों के लिए अत्यंत उपयोगी है और इसे भारत सरकार से पेटेंट भी प्राप्त हो चुका है।
दिव्यांग बच्चों के लिए समर्पित कंपनी
अपने बेटे के अनुभव से प्रेरित होकर, नेहा ने एक ऐसी कंपनी की स्थापना की है जो विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए सहायक उपकरण विकसित करती है। उन्होंने अब तक दो प्रकार की विशेष कुर्सियां बनाई हैं और कई अन्य सहायक उपकरणों पर भी काम कर रही हैं, ताकि दिव्यांग बच्चे अपने दैनिक कार्यों को अधिक आत्मनिर्भरता से कर सकें।
शिक्षा विभाग से जुड़ाव
यह नवाचार शिक्षा विभाग के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को स्कूलों में समावेशी शिक्षा प्राप्त करने में सहायता कर सकता है। भविष्य में, ऐसे उपकरणों के माध्यम से अधिक से अधिक दिव्यांग बच्चे सामान्य स्कूलों में अपनी शिक्षा पूरी कर सकेंगे।
📲 खबर पसंद आई?
अपने दोस्तों के साथ शेयर करें!

Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।