
नागौर की इन स्वास्थ्य इकाइयों को मिला राष्ट्रीय सम्मान, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की ओर कदम
Posted on 29 जुलाई 2026
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हमारे **नागौर** संवाददाता के अनुसार, जिले की दो महत्वपूर्ण सामुदायिक स्वास्थ्य इकाइयों, सारोलाकला और चौमहला, ने स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार के राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन कार्यक्रम (NQAS) के तहत इन दोनों अस्पतालों को राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन से सम्मानित किया गया है। यह प्रमाणन चिकित्सा संस्थानों के लिए एक प्रतिष्ठित मान्यता है, जो सेवा की गुणवत्ता और मरीज संतुष्टि के उच्च मानकों को दर्शाता है।
12 मानकों पर परखी गईं स्वास्थ्य सेवाएं
मूल्यांकन प्रक्रिया अत्यंत कठोर थी, जिसमें राष्ट्रीय स्तर की एक विशेषज्ञ टीम ने दोनों अस्पतालों का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने ओपीडी, आईपीडी, प्रसूति गृह, प्रयोगशाला, दवा उपलब्धता, साफ-सफाई, संक्रमण नियंत्रण और मरीजों की संतुष्टि जैसे कुल 12 महत्वपूर्ण गुणवत्ता मानकों पर सेवाओं का मूल्यांकन किया। इस कड़ी परीक्षा में सीएचसी सारोलाकला ने 95.96 प्रतिशत अंक प्राप्त कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जबकि सीएचसी चौमहला ने 93.30 प्रतिशत अंक हासिल किए।
चार चरणों की कठोर मूल्यांकन प्रक्रिया
एनक्यूएएस नोडल अधिकारी डॉ. अरविंद कुमार नागर ने बताया कि राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन प्राप्त करना एक बहु-चरणीय प्रक्रिया है। इसमें चिकित्सा संस्थानों को आंतरिक, जिला, राज्य और अंततः राष्ट्रीय स्तर पर चार चरणों की कठोर मूल्यांकन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इन सभी चरणों में निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरने के बाद ही यह प्रतिष्ठित प्रमाणन प्रदान किया जाता है।
सामूहिक प्रयासों से मिली सफलता
इस महत्वपूर्ण उपलब्धि का श्रेय जिला कलक्टर अजय सिंह राठौड़ के कुशल मार्गदर्शन, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. साजिद खान के नेतृत्व, एनक्यूएएस नोडल अधिकारी डॉ. अरविंद कुमार नागर के प्रयासों, संबंधित बीसीएमओ, चिकित्सा अधिकारियों डॉ. शिवलाल मीणा और डॉ. राजकुमार बाघेला, और सबसे बढ़कर, दोनों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की पूरी टीम के अथक सामूहिक प्रयासों को दिया जाता है।
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का बढ़ता स्तर
सीएमएचओ डॉ. साजिद खान ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि झालावाड़ जिले ने अब तक 46 चिकित्सा संस्थानों को राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन दिलाने में सफलता पाई है, जिसमें 2 सीएचसी, 10 पीएचसी और 34 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (सब-सेंटर) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 68 चिकित्सा संस्थानों को राज्य स्तरीय गुणवत्ता प्रमाणन भी प्राप्त हुआ है।
वित्तीय सहायता और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं
राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन मिलने से सीएचसी और पीएचसी को अगले तीन वर्षों तक प्रतिवर्ष 3 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त होगी, जिसका उपयोग विकास और सेवा सुधार के लिए किया जाएगा। वहीं, सब-सेंटरों को 2.16 लाख रुपये प्रतिवर्ष मिलेंगे। यह वित्तीय सहायता स्वास्थ्य सेवाओं को और भी बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस उपलब्धि का सीधा लाभ क्षेत्र के नागरिकों को मिलेगा, जिन्हें अब सुरक्षित, भरोसेमंद और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं लगातार उपलब्ध होंगी। स्वास्थ्य विभाग अन्य चिकित्सा संस्थानों को भी एनक्यूएएस प्रमाणन दिलाने के लिए प्रयासरत है।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।