
नागौर सहित प्रदेशभर में सरकारी स्कूलों का नामांकन बढ़ा: 5 साल बाद दिखी बड़ी उछाल
Posted on 22 जुलाई 2026
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, प्रदेश के सरकारी स्कूलों में लगातार चार साल से घट रहे नामांकन पर इस साल ब्रेक लग गया है। सरकार द्वारा निजी स्कूलों की तर्ज पर 1 अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र शुरू करने का सकारात्मक असर अब स्पष्ट रूप से आंकड़ों में दिखाई दे रहा है। शिक्षा विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, राजस्थान के सरकारी स्कूलों में अब तक 72,51,712 विद्यार्थियों का नामांकन हो चुका है। यह आंकड़ा पिछले साल के 72,51,450 नामांकन से अधिक है, जो पिछले पांच सालों में पहली बार हुई वृद्धि को दर्शाता है। यह प्रदेशभर के लिए एक बड़ी उपलब्धि है और शिक्षा के क्षेत्र में एक नए अध्याय का संकेत है।
नामांकन में यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब शिक्षा विभाग ने विभिन्न स्तरों पर कड़ी मेहनत की है। नया शैक्षणिक सत्र समय पर शुरू होने से विद्यार्थियों को स्कूलों से जुड़ने का पर्याप्त समय मिला। इसके साथ ही, व्यापक स्तर पर चलाए गए 'प्रवेशोत्सव' अभियान और ड्रॉपआउट बच्चों को स्कूलों से दोबारा जोड़ने के प्रयासों का भी इसमें महत्वपूर्ण योगदान रहा है। हमारी टीम ने पाया कि शिक्षकों ने घर-घर जाकर बच्चों को स्कूल लाने के लिए प्रेरित किया, जिससे यह सकारात्मक परिणाम सामने आया है।
नामांकन वृद्धि के प्रमुख कारण
- समय पर नया सत्र प्रारंभ: 1 अप्रैल से शैक्षणिक सत्र शुरू होने से विद्यार्थियों को प्रवेश के लिए पर्याप्त समय मिला और पढ़ाई का नुकसान भी नहीं हुआ।
- सघन प्रवेशोत्सव अभियान: शिक्षा विभाग, बीकानेर निदेशालय के मार्गदर्शन में चलाए गए प्रवेशोत्सव के दौरान शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
- ड्रॉपआउट विद्यार्थियों को पुनः जोड़ना: उन बच्चों की पहचान कर, जिन्होंने बीच में ही स्कूल छोड़ दिया था, उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से दोबारा जोड़ने के सफल प्रयास किए गए।
- निशुल्क पाठ्यपुस्तक और यूनिफॉर्म: सरकार की ओर से विद्यार्थियों को समय पर निशुल्क पाठ्यपुस्तकें और दो जोड़ी यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिली।
- छात्रवृत्ति एवं अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ: विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं और अन्य प्रोत्साहन कार्यक्रमों ने भी विद्यार्थियों और अभिभावकों को सरकारी स्कूलों की ओर आकर्षित किया।
वर्तमान में भी प्रवेश प्रक्रिया जारी है, जिससे नामांकन के आंकड़ों में और भी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए प्रवेश की अंतिम तिथि 25 जुलाई निर्धारित की गई है, जबकि कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थी पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान प्रवेश ले सकेंगे। इससे स्पष्ट है कि शिक्षा विभाग ने यह सुनिश्चित करने के लिए सभी दरवाजे खुले रखे हैं कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
जयपुर जिले में अभी भी चुनौती
हालांकि, प्रदेशभर में नामांकन में वृद्धि दर्ज की गई है, लेकिन कुछ जिलों को अभी भी अपने पिछले वर्ष के आंकड़ों तक पहुंचने में चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। जयपुर जिला इनमें से एक है, जहां पिछले वर्ष 3,16,950 विद्यार्थियों का नामांकन था, जबकि इस बार अब तक 3,10,389 विद्यार्थियों ने ही प्रवेश लिया है। हालांकि, शिक्षा विभाग द्वारा प्रवेशोत्सव अभी भी जारी है और आने वाले दिनों में जयपुर जिले में भी नामांकन बढ़ने की पूरी उम्मीद है।
यह नामांकन वृद्धि न केवल सरकारी स्कूलों के लिए एक शुभ संकेत है, बल्कि यह इस बात की भी पुष्टि करता है कि राज्य सरकार की शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता और शिक्षा विभाग द्वारा किए गए सुनियोजित प्रयास रंग ला रहे हैं। हमारी टीम को उम्मीद है कि यह सकारात्मक बदलाव शिक्षा के स्तर को और बेहतर बनाने में सहायक होगा और प्रदेश के हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।