
डेगाना के राजकीय स्कूल में मां सरस्वती मंदिर का लोकार्पण: शिक्षा और संस्कारों का संगम
Posted on 22 जुलाई 2026
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नागौर, 22 जुलाई 2026: शिक्षा के मंदिर, विद्यालयों में सिर्फ किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना का संचार भी बेहद आवश्यक है। इसी कड़ी में, डेगाना ब्लॉक के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय गुणसली में आज, बुधवार नवमी के शुभ अवसर पर, मां सरस्वती के भव्य मंदिर का लोकार्पण किया गया। यह पहल न केवल विद्यार्थियों में शिक्षा के प्रति समर्पण भाव बढ़ाएगी, बल्कि उनमें उत्तम संस्कारों और आध्यात्मिक मूल्यों का भी विकास करेगी।
हमारे डेगाना संवाददाता के अनुसार, इस प्रेरणादायी निर्माण कार्य को एक समर्पित भामाशाह परिवार ने अंजाम दिया है। इस पहल ने विद्यालय परिसर को एक नई पहचान दी है, जहां अब छात्र-छात्राएं विद्या की देवी का आशीर्वाद प्राप्त कर अपनी शिक्षा यात्रा को और भी सार्थक बना सकेंगे।
भामाशाहों का सम्मान और वैदिक मंत्रोच्चार
विद्यालय परिसर में नव-निर्मित इस मंदिर का लोकार्पण भामाशाह नारायण राम जागूं, डॉ. रामनिवास और रामकिशोर ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर पंडित पूज्य शिवरतन महाराज ने विशेष रूप से उपस्थित होकर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मां सरस्वती की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा और स्थापना संपन्न करवाई। समूचा विद्यालय परिवार और उपस्थित ग्रामीणजन इस पावन बेला के साक्षी बने। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा, जिससे सभी में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ।
शिक्षा, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना का विकास
इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानाचार्य ललित जागूं ने भामाशाह परिवार के निस्वार्थ योगदान की हृदय से सराहना की। उन्होंने जोर देकर कहा कि विद्यालय में मां सरस्वती मंदिर की स्थापना से विद्यार्थियों में शिक्षा के प्रति गहरा अनुराग उत्पन्न होगा। इसके साथ ही, यह मंदिर उन्हें उच्च नैतिक मूल्यों, उत्तम संस्कारों और आध्यात्मिक चेतना के विकास में भी सहायक होगा। हमारा मानना है कि ऐसे कदम विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए मील का पत्थर साबित होते हैं, जो उन्हें केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर एक बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देते हैं।
विद्यालय प्रशासन ने इस पुनीत कार्य के लिए भामाशाह परिवार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उनका सम्मान माल्यार्पण और साफा पहनाकर किया गया, जो राजस्थान की परंपरा के अनुसार सम्मान का प्रतीक है। इस प्रकार के सामुदायिक सहयोग से ही शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए जा सकते हैं। यह दर्शाता है कि जब समाज और शिक्षण संस्थान मिलकर काम करते हैं, तो कितने बड़े और सकारात्मक बदलाव लाए जा सकते हैं।
ग्रामीणों और प्रबुद्धजनों की भागीदारी
इस महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण और प्रबुद्धजन उपस्थित रहे, जिनमें रामेश्वर लाल गुगड़वाल, ओमप्रकाश, मिश्रीलाल, गजेन्द्र सिंह, नयमुदीन, बजरंग लाल सोहू, गोदूराम, रवि शर्मा, शोभा गौड़, भरत नराधणिया, धर्माराम प्रजापत, रामनिवास बेनीवाल, कुन्ना राम सोहू, प्रेमसुख, गोरधन, आईदान राम, नेमाराम सिवर, हरिप्रकाश, सुभाष टेलर सहित समस्त स्कूल स्टाफ और विद्यार्थी शामिल थे। सभी ने इस पहल की सराहना की और इसे शिक्षा के क्षेत्र में एक नई दिशा बताया। ग्रामीणों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने इस आयोजन को और भी सफल और यादगार बना दिया। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि शिक्षा केवल सरकारी तंत्र की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है।
यह मंदिर अब गुणसली स्कूल के विद्यार्थियों के लिए ज्ञान और प्रेरणा का एक स्थायी स्रोत बन गया है। हम आशा करते हैं कि भविष्य में भी ऐसे ही सामुदायिक सहयोग से शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार होते रहेंगे, जिससे हमारे बच्चों का उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित हो सके।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।