
सत्संग से दूर होती है मन की मैल: आचार्य भगवानदास महाराज
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार...
नागौर शहर के रामपोल सत्संग भवन में आयोजित दिमासीय चातुर्मास सत्संग सभा में पुष्कर धाम के पीठाधीश्वर आचार्य भगवानदास महाराज ने कहा कि मनुष्य को किसी भी रूप में परमात्मा से अपना संबंध अवश्य जोड़ना चाहिए। उन्होंने विभिन्न माध्यमों जैसे भजन, गायन, वादन अथवा पूर्ण भाव-विभोर होकर ईश्वर से जुड़ने की प्रेरणा दी।
सत्संग की महत्ता
आचार्य भगवानदास महाराज ने सत्संग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिस प्रकार नियमित रूप से बर्तनों को धोने से वे स्वच्छ हो जाते हैं, उसी प्रकार सत्संग में भाग लेने से मनुष्य के मन की अशुद्धियाँ और मैल दूर होती है। उन्होंने अज्ञान को एक प्रकार के नशे की संज्ञा दी, जिसके प्रभाव में व्यक्ति अनुभवहीन बना रहता है। इस नशे में फंसा व्यक्ति ईश्वर को जानकर भी उसे महसूस करने की क्षमता खो देता है।
अज्ञानता का दुष्परिणाम
उन्होंने मछली के एक रोचक उदाहरण के माध्यम से अनुभव की कमी को समझाया। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार एक मछली पानी में रहते हुए भी प्यासी रहती है, उसी प्रकार अज्ञानता में डूबा व्यक्ति सत्य और ज्ञान के इतने निकट होने के बावजूद उसे प्राप्त नहीं कर पाता। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को सत्संग के माध्यम से आत्मिक शुद्धि और परमात्मा के अनुभव के लिए प्रेरित किया।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।