
राजस्थान शिक्षा विभाग: बकाया मानदेय के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने खोला मोर्चा, सौंपा ज्ञापन
Posted on 25 जुलाई 2026
Listen News
Audio Summary
हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, राजस्थान के राजकीय विद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने अपने बकाया मानदेय और लंबित मांगों को लेकर सरकार के समक्ष अपनी बात रखी है। शुक्रवार को जिला कार्यालय में प्रशिक्षकों ने एक प्रतिनिधिमंडल के रूप में एडीपीसी के नाम ज्ञापन सौंपा, जिसमें समय पर वेतन भुगतान न होने से उत्पन्न आर्थिक संकट का उल्लेख किया गया है।
प्रशिक्षकों का दर्द: मानदेय का भुगतान क्यों अटका?
विगत कई महीनों से व्यावसायिक शिक्षा से जुड़े प्रशिक्षक अपने मानदेय के भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। समग्र शिक्षा अभियान (समसा) संकुल से भुगतान के स्पष्ट निर्देश जारी होने के बावजूद, संबंधित कंपनियों द्वारा राशि का हस्तांतरण प्रशिक्षकों के खातों में नहीं किया गया है। इसके चलते शिक्षकों के समक्ष गंभीर आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
प्रमुख मांगें और भविष्य की रणनीति
व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर स्पष्ट रूप से आवाज उठाई है, जो सीधे तौर पर शिक्षा विभाग के कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती हैं:
- बकाया मानदेय का त्वरित भुगतान: सभी 63 प्रशिक्षकों ने कंपनियों द्वारा लंबित वेतन का तुरंत भुगतान करने की मांग की है।
- ब्यूटी एंड वेलनेस ट्रेड पर विशेष चिंता: ब्यूटी एंड वेलनेस ट्रेड के प्रशिक्षकों को दोबारा नियोजित (Re-engagement) न किए जाने के कारण आक्रोश है। उन्होंने इसे वापस बहाल करने की मांग की है।
- शिक्षा निदेशालय को संदेश: प्रशिक्षकों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो वे अपनी नाराजगी को और अधिक मुखर करेंगे।
क्या है इसका असर?
प्रदेश के स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा के माध्यम से बच्चों को कौशल विकास का प्रशिक्षण देने वाले इन प्रशिक्षकों का यह कदम दर्शाता है कि संविदा आधारित नियुक्तियों में वेतन भुगतान की प्रक्रिया अभी भी सुचारू नहीं है। बीकानेर स्थित शिक्षा निदेशालय और जयपुर सचिवालय तक यह संदेश पहुंच चुका है, और उम्मीद है कि जल्द ही इन प्रशिक्षकों के हित में कोई ठोस नीतिगत फैसला लिया जा सकता है।
हमारा मानना है कि शिक्षकों का मनोबल और आर्थिक सुरक्षा ही शिक्षा की गुणवत्ता को सुनिश्चित करती है। स्थानीय स्तर पर इन प्रशिक्षकों ने एकजुटता दिखाते हुए शासन से मांग की है कि उनकी समस्याओं को 'समग्र शिक्षा' के एजेंडे में प्राथमिकता दी जाए।
📲 खबर पसंद आई?
अपने दोस्तों के साथ शेयर करें!

Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।