
नागौर: सरकारी अस्पताल में लापरवाही, गलत ब्लड चढ़ाने से प्रसूता की किडनी पर असर
Posted on 17 जुलाई 2026
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नागौर: जिले के एक सरकारी अस्पताल में हुई गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां एक प्रसूता को गलत ब्लड ग्रुप चढ़ा दिया गया। इस घटना के कारण महिला की तबीयत बिगड़ गई और उसकी किडनी पर गहरा असर पड़ा है। यह घटना चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
मामले का विवरण
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जोधपुर के उम्मेद अस्पताल में भर्ती प्रसूता धापू भील (24) को गलत ब्लड चढ़ा दिया गया। प्रसूता और एक अन्य महिला के नाम, साथ ही उनके पतियों के नाम भी एक समान होने के कारण यह गफलत हुई। इस लापरवाही के चलते धापू भील को यूरिन आना बंद हो गया और उसकी किडनी प्रभावित हुई।
जांच और रिपोर्ट
मामला सामने आने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल को शुक्रवार को एक रिपोर्ट सौंपी गई। इस रिपोर्ट में यह स्वीकार किया गया है कि बिना जांचे-परखे गलत ब्लड चढ़ाया गया। हालांकि, रिपोर्ट को अधूरा मानते हुए प्रिंसिपल डॉ. बीएस जोधा ने इसमें लापरवाही बरतने वाले सभी कर्मचारियों के नाम मांगे हैं। उन्होंने बताया कि रेजिडेंट डॉक्टर, लैब टेक्नीशियन और नर्सिंग स्टाफ की लापरवाही सामने आई है, जिन्हें नोटिस जारी किए जाएंगे।
घटनाक्रम
सूत्रों के अनुसार, प्रसूता धापू भील को 11 जुलाई को जोधपुर जिले के बावड़ी हॉस्पिटल में नॉर्मल डिलीवरी के बाद खून की कमी के चलते उम्मेद अस्पताल रेफर किया गया था। 11 जुलाई को O पॉजिटिव ब्लड चढ़ाया गया, लेकिन 12 जुलाई की रात को गलती से B पॉजिटिव ब्लड चढ़ा दिया गया। ब्लड चढ़ाने के तुरंत बाद प्रसूता को कंपकंपी छूटने लगी और यूरिन के साथ ब्लड आने लगा। 13 जुलाई को उसे महात्मा गांधी अस्पताल रेफर किया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है और डायलिसिस भी किया जा रहा है।
जांच कमेटी का गठन
इस गंभीर घटना के बाद उम्मेद अस्पताल के अधीक्षक डॉ. मोहन मकवाना ने पांच डॉक्टर्स की एक टीम गठित की थी। इस टीम ने अपनी रिपोर्ट मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल को सौंप दी है, लेकिन कुछ कमियों के चलते इसे दोबारा सौंपने की बात कही गई है। प्रिंसिपल ने जोर देकर कहा है कि सैंपल लेने, रिलीज करने और ब्लड देने वाले सभी दोषियों के नाम सामने आने पर उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
हमारा नागौर संवाददाता के अनुसार,
इस प्रकार की घटनाएं चिकित्सा सेवाओं में लापरवाही को उजागर करती हैं। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि रहे। सभी संबंधित चिकित्सा कर्मियों को उचित प्रशिक्षण और दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने के लिए निर्देशित किया जाना चाहिए।
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Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।
