
खींवसर में मृत गोवंश खुले में फेंका, ग्रामीणों का आक्रोशित प्रदर्शन
Listen News
Audio Summary
हमारे खींवसर संवाददाता के अनुसार, नागौर जिले के खींवसर उपखंड मुख्यालय स्थित 220 केवी जीएसएस के सामने अंगोर क्षेत्र में मृत गोवंश को खुले में फेंकने का एक गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना से आसपास की ढाणियों में रहने वाले ग्रामीणों में भारी रोष और नाराजगी व्याप्त है। ग्रामीणों ने इस अमानवीय कृत्य के खिलाफ एकजुट होकर प्रदर्शन किया और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
टोलकर्मियों पर गंभीर आरोप
घटना की जानकारी मिलने पर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्रित हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि हाईवे पर अज्ञात वाहन की टक्कर से मृत हुए गोवंश को टांकला टोल कर्मियों ने यहां लाकर खुले में फेंक दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है, जब इस तरह की घटना हुई है। इससे पहले भी कई बार ढाणियों के पास मृत पशु फेंके जा चुके हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में गंदगी और गंभीर संक्रमण फैलने का खतरा लगातार बना रहता है। इस प्रकार की लापरवाही सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा पैदा करती है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें और चेतावनी
- तत्काल गोवंश हटाना: ग्रामीणों ने मौके पर मौजूद अधिकारियों से मृत गोवंश को तुरंत प्रभाव से हटाने की मांग की है, ताकि क्षेत्र में फैल रही दुर्गंध और संक्रमण के खतरे को कम किया जा सके।
- निष्पक्ष जांच: उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराने की मांग की, ताकि यह पता चल सके कि कौन इसके लिए जिम्मेदार है और किसके आदेश पर यह कृत्य किया गया।
- दोषियों पर सख्त कार्रवाई: ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि दोषी पाए जाने वाले टोल कर्मियों या अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
- आंदोलन की चेतावनी: ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द से जल्द ध्यान नहीं दिया गया और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो वे एक बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि वे अपने क्षेत्र और स्वास्थ्य के प्रति इतनी बड़ी लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेंगे।
जनस्वास्थ्य पर मंडराता खतरा
खुले में मृत पशुओं को फेंकना न केवल पर्यावरण प्रदूषण का कारण बनता है, बल्कि यह गंभीर जनस्वास्थ्य समस्याओं को भी जन्म देता है। मृत पशुओं के सड़ने से निकलने वाली दुर्गंध से वायु प्रदूषित होती है और यह क्षेत्र में मक्खी-मच्छरों और अन्य रोग वाहकों को आकर्षित करती है, जिससे डायरिया, हैजा, टायफाइड और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है। प्रशासन को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए और मृत पशुओं के निस्तारण के लिए एक उचित और वैज्ञानिक व्यवस्था स्थापित करनी चाहिए, ताकि ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके और ग्रामीणों को स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण मिल सके। हमारी टीम इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और संबंधित अधिकारियों से प्रतिक्रिया प्राप्त करने का प्रयास कर रही है।
📲 खबर पसंद आई?
अपने दोस्तों के साथ शेयर करें!

Written & Verified By
AbhishekChief Editor
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।